आधुनिक परिप्रेक्ष्य के आधार पर समाज मे संत कबीर और संत रविदास के विचारों की प्रासंगिकता
हिन्दू समाज, द्विजों और शूद्रों, सधर्मी, भेदभाव, वर्णभेद, अधिकारिणी
मुसलमानों के आगमन से हिन्दू समाज पर प्रभाव पड़ा, उन्होंने देखा कि मुसलमानों में द्विजों और शूद्रों का भेद नहीं है। सधर्मी होने के कारण वे सब एक हैं। अतएव इन ठुकराए हुए शूद्रों में से ही कुछ ऐसे महात्मा निकले जिन्होंने मनुष्यों की एकता को उद्घोषित करना चाहा। इस नवोस्थित भक्ति रंग में सम्मिलित होकर हिन्दू समाज में प्रचलित इस भेदभाव के विरुद्ध भी आवाज उठाई गई। रामानन्द जी ने सबके लिए भक्ति का मार्ग खोलकर उनको प्रोत्साहित किया। नामदेव, दरजी, रैदास चमार, दादू, धुनिया, कबीर जुलाहा आदि समाज की नीची श्रेणी के ही थे। परन्तु उनका नाम आज तक आदर से लिया जाता है। वर्णभेद से उत्पन्न उच्चता और नीचता को ही नहीं, वर्गभेद से उत्पन्न उच्चता नीचता को भी दूर करने का इस निर्गुण भक्ति से प्रयत्न किया। स्त्रियों का पद स्त्री होने के कारण नीचा न रह पाया। पुरुषों के समान वे भी भक्ति की अधिकारिणी हुई।
"आधुनिक परिप्रेक्ष्य के आधार पर समाज मे संत कबीर और संत रविदास के विचारों की प्रासंगिकता", IJSDR - International Journal of Scientific Development and Research (www.IJSDR.org), ISSN:2455-2631, Vol.9, Issue 2, page no.260 - 264, February-2024, Available :https://ijsdr.org/papers/IJSDR2402037.pdf
Volume 9
Issue 2,
February-2024
Pages : 260 - 264
Paper Reg. ID: IJSDR_210078
Published Paper Id: IJSDR2402037
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Research Area: Social Science and Humanities
Country: अमरोहा, उत्तर प्रदेश, भारत
ISSN: 2455-2631 | IMPACT FACTOR: 9.15 Calculated By Google Scholar | ESTD YEAR: 2016
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Publisher: IJSDR(IJ Publication) Janvi Wave